नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ECI) से मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव से जुड़े मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद वह यह देखना चाहती है कि फॉर्म में बदलाव किसने और किस तरह किया।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है। यह विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ऑनलाइन Form 6 में किए गए कथित बदलावों से जुड़ा है। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
Form 6 में क्या बदलाव विवाद का कारण बना
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में निर्वाचन आयोग के ECINet पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन Form 6 में आवेदकों से यह जानकारी मांगी जाने लगी कि वे स्वयं, उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले SIR की मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जानकारी के बिना फॉर्म आगे जमा नहीं किया जा सकता था।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि Form 6 में दो नई शर्तें जोड़ी गई थीं और इनका इस्तेमाल दिल्ली में भी SIR के दौरान किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि संशोधित Form 6 को अदालत की मंजूरी प्राप्त नहीं थी। पीठ ने कहा कि जब रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे तो वह यह देखेगी कि फॉर्म में क्या बदलाव किए गए और उन्हें किसने अधिकृत किया।
अदालत ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है और याचिका को निर्वाचन आयोग से जुड़े एक अन्य मामले के साथ जोड़ दिया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि Form 6 में बदलाव किस अधिकारी या संस्था ने किया या वह कानूनी रूप से वैध था या नहीं।
निर्वाचन आयोग का क्या कहना है
इस विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि SIR के लिए Form 6 के साथ जोड़ा गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले में बरकरार रखा गया था। आयोग ने यह भी कहा था कि गैर-SIR अवधि में निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित Form 6 का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
आयोग का पक्ष है कि Form 6 के मूल वैधानिक प्रारूप में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के लिए उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी इस बात की जांच से जुड़ी है कि ऑनलाइन प्रक्रिया में वास्तव में क्या बदलाव किए गए और उन्हें किस अधिकार के तहत लागू किया गया।
मामला अब रिकॉर्ड की जांच पर टिका
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बिहार और अन्य राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पहले से राजनीतिक और कानूनी बहस चल रही है। मई 2026 के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को विशेष पुनरीक्षण की जरूरतों के अनुरूप दस्तावेजी प्रक्रिया तैयार करने की सीमित शक्ति मानी थी, लेकिन यह भी कहा था कि यह अधिकार असीमित नहीं है।
अब Form 6 से जुड़े मूल रिकॉर्ड मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि कथित बदलाव की प्रकृति क्या थी और उसे लागू करने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई थी।











