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अपराध

सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिवाली बोनस की फर्जी ख़बर वायरल, नोएडा पुलिस ने किया सच का ख़ुलासा

सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के नाम से एक फर्जी आदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सभी कंपनियों के लिए 5 नवंबर तक दिवाली बोनस देना अनिवार्य बताया गया था। नोएडा पुलिस और श्रम विभाग ने इस दावे का पूरी तरह खंडन किया है।

सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिवाली बोनस की फर्जी ख़बर वायरल, नोएडा पुलिस ने किया सच का ख़ुलासा

AI-निर्मित तस्वीर

नोएडा | सोशल मीडिया पर इन दिनों एक फर्जी दावा तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों को 5 नवंबर तक अनिवार्य रूप से दिवाली बोनस देने का निर्देश दिया है। इस भ्रामक और फर्जी संदेश के सामने आने के बाद नोएडा पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए नागरिकों को ऐसी अफ़वाहों पर ध्यान न देने की सख्त चेतावनी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वोच्च अदालत की तरफ से ऐसा कोई भी निर्देश जारी नहीं किया गया है।

मुख्य बातें

  • सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट में दावा किया गया था कि सभी कंपनियों को 5 नवंबर तक दिवाली बोनस देना होगा और ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
  • गौतम बुद्ध नगर श्रम विभाग ने इन सभी दावों को पूरी तरह ख़ारिज करते हुए इन्हें फर्जी करार दिया है।
  • श्रम विभाग ने नियोक्ताओं और श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की जानकारी या नियमों के सत्यापन के लिए हमेशा आधिकारिक चैनलों का ही उपयोग करें।
  • विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बोनस भुगतान से जुड़े नियम और पात्रता मापदंड तय प्रक्रियाओं के तहत ही संचालित होते हैं।

भ्रामक संदेशों के प्रसार के बाद गौतम बुद्ध नगर श्रम विभाग ने यह भी रेखांकित किया है कि नियोक्ताओं को अपने परिसरों और इस्टेब्लिशमेंट्स (establishments) में वार्षिक बोनस भुगतान नियत समय सीमा यानी 30 नवंबर तक सुनिश्चित करना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की झूठी ख़बरों से औद्योगिक माहौल में अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे न केवल कर्मचारियों में गलत उम्मीदें जगती हैं बल्कि प्रबंधन के साथ असहजता भी बढ़ती है।

यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैल रही अनवेरिफाइड और फेक न्यूज़ की गंभीर समस्या को उजागर करता है। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ऐसे मामलों पर कड़ी नज़र रख रही है ताकि आम जनता को भ्रमित करने वाली ऐसी जानकारियों को रोका जा सके। प्रशासन ने नागरिकों से बार-बार यह अपील की है कि किसी भी प्रकार की सनसनीखेज कानूनी या प्रशासनिक जानकारी को आगे शेयर करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लें।



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