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सामान्य

RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर किया 5.50%, महंगे हो सकते हैं लोन

महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच करीब चार साल बाद पहली बार दरों में बढ़ोतरी; मौद्रिक नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किया गया

RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर किया 5.50%, महंगे हो सकते हैं लोन

AI-निर्मित तस्वीर

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट 25 आधार अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। छह सदस्यीय MPC ने दर बढ़ाने के फैसले पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई।

RBI ने इसके साथ ही अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि केंद्रीय बैंक अब बढ़ती महंगाई और उससे जुड़े जोखिमों को देखते हुए मौद्रिक नीति को अधिक सख्त रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चिंता

RBI के ताजा फैसले के पीछे बढ़ते महंगाई दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर मानसून से जुड़े जोखिम प्रमुख कारकों में शामिल हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी ने भी महंगाई के जोखिम को बढ़ाया है।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया गया है।

करीब चार साल बाद बढ़ी ब्याज दर

RBI ने इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 6.50 प्रतिशत किया था। इसके बाद दरों में कटौती का दौर शुरू हुआ और अक्टूबर 2026 के फैसले से पहले रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर था।

अब 25 आधार अंकों की नई बढ़ोतरी के बाद यह 5.50 प्रतिशत हो गया है। RBI का यह फैसला करीब चार साल बाद दरों में बढ़ोतरी की वापसी को दर्शाता है।

दूसरी प्रमुख दरों में भी बदलाव

रेपो रेट के साथ RBI ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) तथा बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया है।

मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चली। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को नीति फैसले की घोषणा की।

कर्ज लेने वालों पर पड़ सकता है असर

रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है और इसका प्रभाव रेपो से जुड़ी फ्लोटिंग रेट वाली होम लोन, वाहन और व्यक्तिगत ऋण की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। ऐसे कर्ज लेने वालों के लिए अगली रीसेट तारीख पर EMI बढ़ने या ऋण की अवधि बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, वास्तविक असर संबंधित बैंक की ब्याज दर और रीसेट व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

दूसरी ओर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से नए जमा पर बेहतर ब्याज मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है, हालांकि इसका लाभ बैंक की जमा दरों में बदलाव पर निर्भर करेगा।

आगे और बढ़ोतरी के संकेत

RBI के मौद्रिक नीति रुख में बदलाव के बाद बाजार की नजर अब आने वाले महीनों में महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर रहेगी। केंद्रीय बैंक ने साफ संकेत दिया है कि आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों और बदलती परिस्थितियों के आधार पर लिए जाएंगे।



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