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सामान्य

कनॉट प्लेस में Clean-Air Zone बनाने का प्रस्ताव, वाहनों की आवाजाही सीमित करने की तैयारी

CAQM ने दिल्ली सरकार के सामने रखा प्रस्ताव; इनर सर्कल को पैदल यात्रियों के लिए विकसित करने और प्रदूषण घटाने पर जोर, शहर में आगे बड़े लो-एमिशन जोन की भी योजना

कनॉट प्लेस में Clean-Air Zone बनाने का प्रस्ताव, वाहनों की आवाजाही सीमित करने की तैयारी

AI-निर्मित तस्वीर

नई दिल्ली। दिल्ली के कनॉट प्लेस के इनर सर्कल को Clean-Air Zone या Low-Emission Zone के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के सदस्य सचिव तरुण कुमार पीथोड़े ने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव दिल्ली सरकार के सामने रखा गया है। योजना के तहत इनर सर्कल में वाहनों की आवाजाही सीमित करने और क्षेत्र को पैदल यात्रियों के अनुकूल बनाने पर विचार किया जा रहा है।

वाहनों से मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में पहल

तरुण कुमार पीथोड़े ने Urban Adda 2026 में कहा कि कनॉट प्लेस का इनर सर्कल दिल्ली में Clean-Air Zone की शुरुआत के लिए उपयुक्त जगह हो सकता है। इसके तहत निजी वाहनों की आवाजाही कम या पूरी तरह रोककर पैदल चलने और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य केवल वाहनों को हटाना नहीं, बल्कि ऐसा शहरी ढांचा तैयार करना है जहां लोग आसानी से पैदल चल सकें और कम प्रदूषण वाले सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल कर सकें।

पार्किंग की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती

CAQM के मुताबिक, योजना को लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी जरूरी होगी। खास तौर पर बहुस्तरीय पार्किंग सुविधाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करनी होगी, ताकि वाहन लेकर आने वाले लोगों को इनर सर्कल के बाहर पार्किंग की सुविधा मिले और वहां से पैदल या अन्य साधनों से आगे जाने में परेशानी न हो।

सुरक्षा और आवागमन की व्यवस्था को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

दिल्ली में बड़े लो-एमिशन जोन की दिशा में कदम

CAQM सदस्य सचिव ने कहा कि कनॉट प्लेस में प्रस्तावित Clean-Air Zone को आगे चलकर दिल्ली में बड़े Low-Emission Zone की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में देखा जा सकता है। उनके अनुसार, दिल्ली के लिए शहरव्यापी Low-Emission Zone बनाना भी निकट भविष्य में संभव है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट नीतियां, सख्त अनुपालन और दिल्ली-एनसीआर के स्तर पर बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

विशेषज्ञों ने भी बताई जरूरत

Urban Adda में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि Low-Emission Zone तय करते समय केवल यातायात नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के दूसरे स्रोतों को भी ध्यान में रखना होगा। इनमें सड़क की धूल, डीजल जनरेटर और दुकानों या आसपास इस्तेमाल होने वाले ईंधन जैसे स्रोत शामिल हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कनॉट प्लेस जैसे क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, इसलिए यहां प्रदूषण के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या भी अधिक है। हालांकि, ऐसे क्षेत्र में वाहनों पर प्रतिबंध तभी प्रभावी होगा जब लोगों के लिए पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन और अन्य आवागमन विकल्प उपलब्ध हों।

अभी प्रस्ताव के स्तर पर है योजना

कनॉट प्लेस को Clean-Air Zone में बदलने का प्रस्ताव फिलहाल योजना और विचार के स्तर पर है। इसे लागू करने के लिए दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के स्तर पर आगे की तैयारी, पार्किंग, यातायात, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर फैसला होना बाकी है।

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो कनॉट प्लेस दिल्ली का ऐसा प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र बन सकता है जहां प्रदूषण कम करने के साथ पैदल यात्रियों और सार्वजनिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी।



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