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जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का प्रस्ताव, विपक्ष ने उठाए सवाल

योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद नामकरण पर सियासत तेज; अखिलेश यादव ने कसा तंज, कांग्रेस बोली—नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी

जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का प्रस्ताव, विपक्ष ने उठाए सवाल

AI-निर्मित तस्वीर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने और प्रदेश के विकास में उनके योगदान के प्रति आभार जताने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया है।

राज्य सरकार की मंजूरी के बाद नाम बदलने की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की औपचारिक स्वीकृति भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए फिलहाल इसे नामकरण का मंजूर प्रस्ताव कहना उचित है, न कि अंतिम रूप से लागू हो चुका नाम।

अखिलेश यादव का तंज—जाने वाले लोग निशानी छोड़ना चाहते हैं

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को सत्ता से जाने का अंदेशा होता है, वे अपनी याद में निशानियां छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने सरकार पर नामकरण की राजनीति करने और जनता के लिए किए गए कामों के बजाय नाम बदलने पर जोर देने का आरोप लगाया।

अखिलेश ने कहा कि सरकार को ऐसे फैसलों के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों और विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस ने लागत, जलभराव और रोजगार पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भी नाम बदलने के प्रस्ताव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केवल नाम बदलने से एयरपोर्ट की जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। उन्होंने निर्माण लागत में बढ़ोतरी, बारिश के दौरान परिसर में जलभराव और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने जैसे मुद्दे उठाए।

कांग्रेस ने सरकार से यह बताने की मांग की कि एयरपोर्ट से प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के युवाओं को कितने रोजगार मिले हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार को नामकरण की राजनीति के बजाय बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

AIMIM ने किसान नेता या स्वतंत्रता सेनानी के नाम का सुझाव दिया

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता शादाब चौहान ने भी प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जेवर का इलाका कृषि प्रधान है और एयरपोर्ट का नाम किसी किसान नेता या स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर रखने पर विचार किया जा सकता था। उन्होंने मौजूदा प्रस्ताव को सरकार की अपनी छवि और प्रचार से जोड़कर आलोचना की।

जेवर एयरपोर्ट क्यों है अहम?

गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में हवाई यातायात की क्षमता बढ़ाना, माल ढुलाई को प्रोत्साहित करना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक तथा आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी और 28 मार्च 2026 को इसके पहले चरण का उद्घाटन किया था। एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

अब केंद्र की मंजूरी पर नजर

उत्तर प्रदेश कैबिनेट की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्तर पर आगे बढ़ेगा। अंतिम नामकरण की प्रक्रिया और औपचारिक अधिसूचना के बाद ही नए नाम के लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी। इस बीच भाजपा सरकार इसे प्रधानमंत्री के योगदान के प्रति सम्मान बता रही है, जबकि विपक्ष इसे नामकरण की राजनीति बताते हुए रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और विकास के नतीजों पर सवाल उठा रहा है।



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