नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने मक्का रक्षा समझौते को सक्रिय करते हुए सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 5 अक्टूबर को रियाद में हुई आपात बैठक में तीनों देशों ने सऊदी अरब में सहमत सैन्य बलों और सैन्य क्षमताओं की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने पर सहमति जताई।
यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब हूतियों के हमलों के जवाब में सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों ने भी यमन में बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। पिछले कुछ सप्ताह में सऊदी शहरों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ा है।
पहली बार सक्रिय हुआ मक्का रक्षा समझौता
मक्का रक्षा समझौते पर सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए थे। समझौते का मूल प्रावधान यह है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा के खिलाफ हमला माना जाएगा।
5 अक्टूबर को रियाद में मक्का एलायंस फॉर डिफेंस की रणनीतिक-राजनीतिक और रक्षा समिति की आपात बैठक हुई। बैठक में तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने पर सहमति जताई।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की संयुक्त घोषणा के अनुसार, सहमत सैन्य बलों और क्षमताओं की सऊदी अरब में तेजी से तैनाती के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। यह प्रक्रिया संबंधित देशों के स्वीकृत प्रबंधों और उनके राष्ट्रीय कानूनों के तहत होगी।
सऊदी अरब में तैनाती, यमन में सीधे युद्ध को लेकर स्थिति साफ नहीं
मक्का समझौते के तहत सैन्य बलों की तैनाती सऊदी अरब में की जानी है। हालांकि, संयुक्त बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पाकिस्तान और तुर्किये से कितने सैनिक भेजे जाएंगे, उनकी तैनाती किन स्थानों पर होगी या उनकी भूमिका क्या होगी।
सबसे अहम बात यह है कि अभी तक पाकिस्तान या तुर्किये ने यमन में हूतियों के खिलाफ सीधे जमीनी युद्ध में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तत्काल कदम का जोर सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत करने और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने पर है।
हूतियों के हमलों के बीच बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
सऊदी अरब पिछले कुछ समय से हूती हमलों का सामना कर रहा है। इन हमलों में सऊदी शहरों और आर्थिक एवं नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के आरोप हैं। तीनों देशों की बैठक में मक्का और मदीना को निशाना बनाए जाने के कथित प्रयासों की भी कड़ी निंदा की गई।
सऊदी नेतृत्व ने इन हमलों को देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना है। इसी पृष्ठभूमि में मक्का रक्षा गठबंधन को अब राजनीतिक समझौते से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक सैन्य सहयोग की दिशा में ले जाने का फैसला किया गया है।
सऊदी समर्थित यमनी बलों ने शुरू किया जवाबी अभियान
मक्का पैक्ट को सक्रिय करने का फैसला यमन के मोर्चे पर तेजी से बदलती स्थिति के बीच आया है। सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों ने हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने के लिए जवाबी सैन्य अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का एक प्रमुख केंद्र लाल सागर और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य का इलाका है। बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की सैन्य अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
पाकिस्तान ने भी सामूहिक रक्षा पर जताई प्रतिबद्धता
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मक्का रक्षा गठबंधन का उद्देश्य तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है। बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नौमान महमूद को गठबंधन का पहला महासचिव नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने कहा कि एक देश की सुरक्षा को बाकी दोनों देशों की सामूहिक सुरक्षा से अलग नहीं देखा जा सकता। सैन्य सहयोग को व्यावहारिक रूप देने के फैसले को इसी सामूहिक सुरक्षा प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया गया है।
आगे क्या होगा
अब सबसे अहम सवाल यह है कि पाकिस्तान और तुर्किये की सैन्य सहायता किस स्तर तक जाती है और सऊदी अरब में उनकी वास्तविक तैनाती किस स्वरूप में होती है। फिलहाल तीनों देशों ने सैन्य बलों और क्षमताओं की तेजी से तैनाती का फैसला किया है, लेकिन सैनिकों की संख्या, तैनाती के स्थान और परिचालन भूमिका का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मक्का रक्षा समझौते का सक्रिय होना पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस बात पर नजर रहेगी कि यह गठबंधन केवल सऊदी अरब की रक्षात्मक सुरक्षा तक सीमित रहता है या यमन में चल रहे संघर्ष के सैन्य समीकरण को भी प्रभावित करता है।











