नई दिल्ली। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% प्रवेश कोटा प्रभावी तरीके से लागू कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के रवैये पर नाराजगी जताई है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने NCPCR की ओर से दाखिल हलफनामे को संतोषजनक नहीं माना और आयोग के चेयरपर्सन तथा डायरेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
मामला RTE Act, 2009 की धारा 12(1)(c) के क्रियान्वयन से जुड़ा है। इस प्रावधान के तहत संबंधित निजी गैर-सहायता प्राप्त पड़ोसी स्कूलों को प्रवेश स्तर पर अपनी निर्धारित क्षमता की कम से कम 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए रखनी होती हैं और उन्हें निःशुल्क प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध करानी होती है।
NCPCR की भूमिका पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCPCR की भूमिका केवल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आंकड़े इकट्ठा करने या उन्हें एकत्रित करने तक सीमित नहीं हो सकती। अदालत के मुताबिक आयोग को यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना होगा कि कानून का उद्देश्य जमीन पर लागू हो और संबंधित पड़ोसी स्कूल इस व्यवस्था को वास्तव में लागू करें।
सुनवाई के दौरान पीठ ने NCPCR के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग एक वैधानिक संस्था है और उसके ऊपर इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चेयरपर्सन और डायरेक्टर की व्यक्तिगत मौजूदगी का निर्देश अवमानना की कार्यवाही के रूप में नहीं दिया गया है, बल्कि आयोग की भूमिका और उठाए गए कदमों पर स्पष्टता के लिए है।
जनवरी में भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
यह मामला Dinesh Biwaji Ashtikar बनाम State of Maharashtra से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 के अपने फैसले में धारा 12(1)(c) के तहत 25% प्रवेश व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि ‘neighbourhood school’ की अवधारणा का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों के बीच मौजूद बाधाओं को कम करना भी है।
इसके बाद NCPCR को इस प्रक्रिया की निगरानी में भूमिका दी गई। आयोग की ओर से इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) भी मौजूद है। लेकिन मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने आयोग के जवाब को पर्याप्त नहीं माना।
अगली सुनवाई में अधिकारियों को देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने NCPCR के चेयरपर्सन और डायरेक्टर को अगली सुनवाई में शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार मामला 27 अक्टूबर 2026 को फिर सूचीबद्ध किया गया है। अब आयोग को अदालत के सामने यह बताना होगा कि धारा 12(1)(c) के तहत 25% प्रवेश व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू कराने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने NCPCR के खिलाफ कोई दंडात्मक या अवमानना संबंधी आदेश पारित नहीं किया है। अदालत का मौजूदा हस्तक्षेप मुख्य रूप से 25% RTE प्रवेश प्रावधान के प्रभावी क्रियान्वयन और NCPCR की वैधानिक भूमिका पर केंद्रित है।











