नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई तेज हो गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके समर्थकों ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन कई जगह पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कनॉट प्लेस में बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुबह तक 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था।
प्रदर्शन के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को भी दिल्ली पहुंचने पर विमान के भीतर से हिरासत में लिया गया। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है।
कनॉट प्लेस में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ाकर पकड़ा
सुबह करीब नौ बजे कनॉट प्लेस में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की और कई लोगों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया। प्रदर्शन स्थल के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है।
पुलिस ने संसद मार्ग, जनपथ, टॉलस्टॉय मार्ग और अशोका रोड सहित प्रमुख रास्तों पर निगरानी बढ़ाई है। जंतर-मंतर तक पहुंचने के लिए निर्धारित मार्गों पर सुरक्षा जांच की जा रही है। प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद समर्थकों के जुटने की कोशिशों को देखते हुए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।
CJP के संस्थापक और नेताओं को विमान से हिरासत में लिया
प्रदर्शन से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और वरिष्ठ नेताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका को लेकर भी विवाद सामने आया। पार्टी के अनुसार, मुंबई से दिल्ली पहुंची उड़ान में ही पुलिस ने तीनों को रोक लिया। दीपके ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वह गिरफ्तारी से नहीं डरते और प्रदर्शन में शामिल होने आए हैं।
CJP ने नेताओं की हिरासत का विरोध करते हुए उनकी रिहाई की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि नेतृत्व को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पहले से कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था की है।
1,000 से अधिक लोगों को रात में भी हिरासत में लिया गया
प्रदर्शन से पहले शुक्रवार रात से ही पुलिस की कार्रवाई जारी थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार रात 12:30 बजे तक कम से कम 1,000 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया जा चुका था। इनमें दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और पूर्वी दिल्ली के इलाकों से पकड़े गए लोग शामिल थे।
सुबह प्रदर्शन शुरू होने के बाद भी अलग-अलग स्थानों पर हिरासत की कार्रवाई हुई। रातभर की हिरासत और सुबह की कार्रवाई के आंकड़ों को अलग-अलग रिपोर्टों में दर्ज किया गया है, इसलिए इन्हें जोड़कर कुल संख्या बताना उचित नहीं होगा।
मेट्रो स्टेशनों और रेल सेवाओं पर असर
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किए गए। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, 45 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी 10 अक्टूबर को शाम छह बजे तक लागू रहने की जानकारी दी गई थी। वहीं, NDTV की एक अन्य रिपोर्ट में 57 स्टेशनों पर प्रतिबंध का उल्लेख है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले संबंधित स्टेशन की स्थिति की पुष्टि कर लें।
रेल सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबर है। आजतक ने रिपोर्ट किया कि 10 अक्टूबर को सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे के बीच 254 ट्रेनें रद्द की गईं, जिनमें मेल और एक्सप्रेस के साथ लोकल ट्रेनें भी शामिल थीं। हालांकि, यात्रियों को अपनी ट्रेन की मौजूदा स्थिति रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से जांचनी चाहिए।
35 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 35 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक कर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में ड्रोन, सीसीटीवी निगरानी, चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली और पुलिसकर्मियों की वर्दी पर बॉडी कैमरों का इस्तेमाल शामिल है। हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए छह निर्धारित केंद्रों की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
राजधानी की सीमाओं पर वाहनों की जांच बढ़ाई गई है और कई मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू किए गए हैं। मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
SIR विवाद और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
CJP और उसके समर्थकों का प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर है। प्रदर्शनकारी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
निर्वाचन आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान स्थान बदल चुके, मृत या सत्यापन के समय नहीं मिल पाए मतदाताओं की प्रविष्टियों की पहचान की जाती है और पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत, यातायात प्रतिबंध और सार्वजनिक परिवहन पर असर के कारण आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की आगे की रणनीति पर अब पूरे दिन नजर रहेगी।











