वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी और आईटी सेवा कंपनियों के कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़े एक अहम चरण पर रोक लगा दी है। इस फैसले से भारतीय आईटी कंपनियों में काम करने वाले उन पेशेवरों की स्थायी निवास पाने की योजना प्रभावित हो सकती है, जो अपने नियोक्ता के माध्यम से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना चाहते हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग ने 8 अक्टूबर को घोषणा की कि वह इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) के नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और पहले से लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने यह कदम कथित अनियमितताओं की जांच और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार तथा वेतन की सुरक्षा के तर्क के साथ उठाया है। हालांकि, कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इन आठ कंपनियों पर हुई कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई में पांच प्रमुख आईटी सेवा कंपनियां शामिल हैं, जबकि तीन अन्य बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां भी इसकी जद में आई हैं।
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
- इन्फोसिस (Infosys)
- विप्रो (Wipro)
- HCL टेक्नोलॉजीज
- कॉग्निजेंट (Cognizant)
- माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft)
- एडोबी (Adobe)
- कैपजेमिनी (Capgemini)
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा कि इन कंपनियों से जुड़े PERM आवेदनों पर रोक लागू रहेगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई पर विस्तृत प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हुई, जबकि TCS ने टिप्पणी करने से इनकार किया।
क्या है PERM प्रक्रिया और ग्रीन कार्ड से इसका संबंध?
PERM अमेरिका में रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने के प्रमुख रास्तों में से एक है। इस प्रक्रिया में नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग के सामने यह साबित करना होता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को संबंधित पद पर नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों या रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
श्रम प्रमाणन की मंजूरी मिलने के बाद नियोक्ता आम तौर पर कर्मचारी के लिए आगे की आव्रजन याचिका दाखिल कर सकता है। इसके बाद भी ग्रीन कार्ड पाने के लिए अन्य कानूनी शर्तें और प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
इसलिए मौजूदा फैसला सभी ग्रीन कार्ड आवेदनों पर प्रतिबंध नहीं है। यह आठ नामित कंपनियों से जुड़े PERM आवेदनों को प्रभावित करता है और इन कंपनियों के कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास पाने का एक प्रमुख रास्ता फिलहाल बाधित करता है।
भारतीय पेशेवरों पर क्या पड़ेगा असर?
TCS, इन्फोसिस, विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए इस फैसले का असर उनकी मौजूदा आव्रजन स्थिति और ग्रीन कार्ड आवेदन के चरण पर निर्भर करेगा।
जिन कर्मचारियों के लिए अभी PERM प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, उनके नियोक्ता फिलहाल इस कार्यक्रम के तहत नया आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगे। जिनके आवेदन लंबित हैं, उनके मामलों की प्रक्रिया भी रुक सकती है। इससे स्थायी निवास पाने की समय-सीमा अनिश्चित हो सकती है।
हालांकि, इस घोषणा से मौजूदा H-1B कार्य वीजा अपने आप रद्द नहीं होते और न ही पहले से जारी ग्रीन कार्ड स्वतः निरस्त होते हैं। लेकिन जिन कर्मचारियों की दीर्घकालीन आव्रजन योजना नियोक्ता द्वारा कराए जाने वाले श्रम प्रमाणन पर निर्भर है, उन्हें आगे की योजना बनाने में मुश्किल हो सकती है। कुछ कर्मचारियों के लिए, खासकर जिनकी H-1B अवधि समाप्त होने के करीब है, स्थिति अधिक जटिल हो सकती है।
अमेरिकी प्रशासन ने क्यों उठाया कदम?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रोजगार-आधारित आव्रजन व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए नहीं होना चाहिए। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विशेष रूप से माइक्रोसॉफ्ट का उल्लेख करते हुए कंपनी की छंटनी और विदेशी कर्मचारियों के लिए वीजा आवेदनों पर सवाल उठाए।
अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, इन कंपनियों ने वर्ष 2009 से अब तक लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए हैं। विभाग ने यह भी कहा कि इस अवधि में संबंधित कंपनियों को दो लाख 30 हजार से अधिक H-1B वीजा मंजूर हुए और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन जारी किए गए। ये आंकड़े कंपनियों की दीर्घकालीन विदेशी भर्ती गतिविधियों से जुड़े हैं; इन्हें मौजूदा कर्मचारियों या लंबित ग्रीन कार्ड आवेदनों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस रोक की अवधि, इसे हटाने की शर्तों और पहले से मंजूर श्रम प्रमाणनों पर पड़ने वाले असर को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं है। संबंधित कंपनियों की जांच और अमेरिकी श्रम विभाग के अगले फैसले इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए सबसे अहम बात यह है कि यह फैसला सभी भारतीय नागरिकों या सभी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर लागू सामान्य प्रतिबंध नहीं है। इसका दायरा फिलहाल आठ नामित कंपनियों के PERM आवेदनों तक सीमित है। जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया इन कंपनियों के माध्यम से चल रही है, उन्हें अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार नियोक्ता और आव्रजन विशेषज्ञ से आगे के विकल्पों की जानकारी लेनी होगी।











