नई दिल्ली. सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और दुर्घटनाओं में जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने वाहन निर्माण और सुरक्षा मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य सड़क पर चलने वाले यात्रियों और चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मुख्य बातें
- नए वाहनों में ईंधन रिसाव, आग के जोखिम और इलेक्ट्रिकल खतरों को कम करने के लिए सुरक्षा मानदंडों को सख्त किया गया है।
- अप्रैल 2029 से निर्मित सभी नए वाहनों को संशोधित फ्यूल-सिस्टम और ईवी बैटरी सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
- अक्टूबर 2029 से इवेंट डेटा रिकॉर्डर (EDR) स्थापित करना अनिवार्य होगा।
- क्रैश-टेस्ट और पैदल यात्री सुरक्षा केUpdated नियम 2027 से चरणों में लागू किए जाएंगे।
सुरक्षा मानकों में बड़े बदलाव
हालिया संशोधनों के तहत सरकार ने वाहन के पिछले हिस्से में होने वाली टक्करों के दौरान होने वाले खतरों को न्यूनतम करने पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए वाहन निर्माताओं को तकनीकी रूप से उन्नत मानकों का पालन करना होगा। वाहन सुरक्षा के मोर्चे पर यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में सड़क हादसों के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम
सरकार की ओर से तय की गई समयसीमा के अनुसार, क्रैश-टेस्ट और पैदल यात्री सुरक्षा से जुड़े अपडेटेड नियम वर्ष 2027 से अलग-अलग चरणों में लागू किए जाएंगे। इसके बाद, अप्रैल 2029 की समयसीमा के तहत बैटरी और फ्यूल-सिस्टम से जुड़े कड़े नियमों को अनिवार्य कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन सख्त मानकों से वाहन विनिर्माण उद्योग में सुरक्षा के स्तर में सुधार होगा।










