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प्रदूषण नियंत्रण पर सख्ती, हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में 52 एफआईआर दर्ज और 21 गिरफ्तार

हरियाणा में पराली जलाने के मामलों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 52 एफआईआर दर्ज की हैं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ पर्यावरण मुआवजा वसूली और राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसे कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।

प्रदूषण नियंत्रण पर सख्ती, हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में 52 एफआईआर दर्ज और 21 गिरफ्तार

AI-निर्मित तस्वीर

चंडीगढ़. हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राज्य में पराली जलाने के मामलों में कुल 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक बढ़ते प्रदूषण और वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए यह सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

इस कार्रवाई के तहत न केवल कानूनी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, बल्कि किसानों से पर्यावरण मुआवजा भी वसूला जा रहा है। सरकार और प्रशासन का यह सख्त रुख राज्य में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है, ताकि सर्दियों के मौसम में होने वाले वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।

मुख्य बातें

  • हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कुल 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
  • पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
  • पराली जलाने वाले किसानों से पर्यावरण मुआवजा वसूला जा रहा है।
  • राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री का प्रावधान किया गया है।

राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री और एमएसपी पर प्रतिबंध

प्रशासन द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के तहत, पराली जलाने वाले किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी। इस रेड एंट्री के कारण संबंधित cultivator यानी किसान को अगले दो फसल चक्रों (crop cycles) के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर अपनी फसल बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम किसानों को पराली न जलाने के लिए कड़ा संदेश देने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई

कृषि अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में टीमों का गठन किया गया है जो सैटेलाइट डेटा और जमीनी स्तर पर मिल रही सूचनाओं के आधार पर तुरंत कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।



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