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टेक्नोलॉजी

भारत के Deep-Tech स्टार्टअप्स के लिए ₹25,000 करोड़ से अधिक पूंजी जुटने की राह

सरकार के ₹10,000 करोड़ Startup India Fund of Funds 2.0 में Deep-Tech को प्राथमिकता; AIFs के जरिए निजी पूंजी जुटाने से कुल निवेश क्षमता ₹25,000 करोड़ से ऊपर जाने की संभावना

भारत के Deep-Tech स्टार्टअप्स के लिए ₹25,000 करोड़ से अधिक पूंजी जुटने की राह

AI-निर्मित तस्वीर

नई दिल्ली। भारत के Deep-Tech स्टार्टअप्स के लिए सरकार ने लंबी अवधि की पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा ढांचा तैयार किया है। Startup India Fund of Funds 2.0 के तहत सरकार ने ₹10,000 करोड़ का corpus तय किया है और इसमें Deep-Tech, technology-driven manufacturing तथा early-growth startups को प्राथमिकता दी गई है।

सरकार सीधे हर स्टार्टअप में निवेश करने के बजाय इस Fund of Funds के जरिए SEBI-registered Alternative Investment Funds यानी AIFs में पूंजी लगाएगी। ये AIFs आगे स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे। सरकार का मॉडल निजी पूंजी को भी साथ जोड़कर निवेश का आकार बढ़ाने पर आधारित है।

₹25,000 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?

₹25,000 करोड़ का आंकड़ा सीधे सरकारी corpus के रूप में घोषित नहीं किया गया है। Institute of Company Secretaries of India की एक रिपोर्ट के मुताबिक Fund of Funds 2.0 में ₹10,000 करोड़ के सरकारी corpus के साथ AIFs के जरिए अतिरिक्त पूंजी जुटने पर कुल deployment ₹25,000 करोड़ से ऊपर जा सकता है।

यानी Deep-Tech ecosystem के लिए संभावित कुल पूंजी सरकारी ₹10,000 करोड़ से काफी अधिक हो सकती है, लेकिन इसे अभी एक अलग ₹25,000 करोड़ के सरकारी फंड के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Deep-Tech को क्यों मिल रही प्राथमिकता?

Deep-Tech कंपनियां Artificial Intelligence, quantum technology, robotics, advanced manufacturing, aerospace, defence, semiconductors, biotechnology और दूसरे high-technology क्षेत्रों में काम करती हैं। इन क्षेत्रों में product development और commercialisation में कई साल लग सकते हैं और शुरुआती दौर में पूंजी की जरूरत सामान्य software या consumer startups की तुलना में ज्यादा होती है।

इसी वजह से Fund of Funds 2.0 में long-gestation technologies और innovation-driven manufacturing पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसे startups को patient capital उपलब्ध कराना है, जिन्हें traditional venture funding में पर्याप्त पूंजी जुटाने में कठिनाई हो सकती है।

₹1 लाख करोड़ की RDI Scheme भी महत्वपूर्ण

Deep-Tech startups के लिए Startup India FoF 2.0 के साथ Research, Development and Innovation यानी RDI Scheme भी महत्वपूर्ण है। इस योजना का कुल outlay ₹1 लाख करोड़ है और इसका उद्देश्य private sector में research, development और high-impact technology projects को बढ़ावा देना है।

Technology Development Board के अनुसार मई 2026 तक RDI Scheme के तहत 124 proposals मिले थे, जिनकी कुल project value ₹25,000 करोड़ से अधिक थी। इनमें startups, MSMEs और listed companies शामिल थीं तथा health, energy, quantum technology और advanced manufacturing जैसे क्षेत्रों के प्रोजेक्ट सामने आए।

स्टार्टअप्स के लिए क्या बदलेगा?

नए funding framework का सबसे बड़ा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिन्हें prototype से commercial production तक पहुंचने के लिए लंबी अवधि की पूंजी चाहिए। Deep-Tech कंपनियों के लिए केवल शुरुआती seed funding पर्याप्त नहीं होती; testing, certification, manufacturing, infrastructure और market deployment के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है।

सरकार ने Fund of Funds 2.0 को इसी capital gap को कम करने के लिए तैयार किया है। इसके तहत छोटे और नए venture funds को भी समर्थन देने का प्रावधान है, ताकि funding केवल बड़े startup hubs तक सीमित न रहे।

भारत के Deep-Tech ecosystem पर फोकस

सरकार पिछले कुछ समय से AI, quantum, space technology, defence technology, semiconductors और advanced manufacturing को strategic technology sectors के तौर पर बढ़ावा दे रही है। Fund of Funds 2.0 और RDI Scheme इसी broader strategy का हिस्सा हैं।

आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि AIFs कितनी निजी पूंजी जुटाते हैं, कितने Deep-Tech startups तक funding पहुंचती है और कितनी कंपनियां research stage से सफल commercial products तक पहुंच पाती हैं।



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