नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के EOS-06 यानी Oceansat-3 सैटेलाइट ने भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे अल नीनो से जुड़े अहम बदलाव दर्ज किए हैं। ISRO के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने EOS-06 के Ocean Colour Monitor-3 (OCM-3) और Scatterometer से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें जून 2026 के दौरान समुद्र की सतह पर क्लोरोफिल-ए की मात्रा में उल्लेखनीय कमी सामने आई, जो समुद्री जैव उत्पादकता में गिरावट का संकेत है।
हवाओं की दिशा बदली, कमजोर पड़ा समुद्री अपवेलिंग
ISRO ने 2023 से 2026 तक अप्रैल, मई और जून के आंकड़ों की तुलना की। जून 2024 और जून 2025 में ENSO की स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य थी, जबकि जून 2026 में पश्चिमी और मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत के कुछ हिस्सों में सतही क्लोरोफिल-ए घटा मिला।
इसी अवधि में समुद्र की सतह पर चलने वाली हवाओं में भी बदलाव दर्ज हुआ। सामान्य तौर पर पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली easterly trade winds कमजोर हुईं और कुछ क्षेत्रों में उनका रुख पश्चिम से पूर्व की ओर यानी westerly हो गया। ISRO के मुताबिक, इस बदलाव से समुद्र के भीतर से ठंडे और पोषक तत्वों से भरपूर पानी के ऊपर आने वाली सामान्य upwelling प्रक्रिया कमजोर हुई, जिससे सतह पर फाइटोप्लांकटन की वृद्धि प्रभावित हुई।
अल नीनो की तीव्रता पर नजर
EOS-06 से मिले ये संकेत उस समय सामने आए हैं जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार 2026 में अल नीनो पहले ही स्थापित हो चुका है और उसके आगे मजबूत होने का अनुमान है। सितंबर में जारी WMO अपडेट में कहा गया कि सितंबर-नवंबर 2026 और दिसंबर 2026-फरवरी 2027 के दौरान अल नीनो के बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है और इसके वर्ष के अंत में बहुत मजबूत स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।
ISRO ने कहा है कि अगर अल नीनो आगे और मजबूत होता है तो कम क्लोरोफिल वाला क्षेत्र और स्पष्ट हो सकता है। इसके प्रभाव को समझने के लिए आने वाले महीनों में भूमध्यरेखीय हवाओं के साथ समुद्र की सतह के तापमान, समुद्र-स्तर, थर्मोक्लाइन की गहराई और समुद्री परिसंचरण में होने वाले बदलावों का भी विश्लेषण किया जाएगा।
EOS-06 क्यों महत्वपूर्ण है?
EOS-06, Oceansat श्रृंखला की तीसरी पीढ़ी का उपग्रह है। इसमें OCM-3, Sea Surface Temperature Monitor और Ku-band Scatterometer जैसे उपकरण हैं, जिनसे समुद्र के रंग, समुद्री सतह के तापमान और हवाओं से संबंधित आंकड़े हासिल किए जाते हैं। उपग्रह को PSLV-C54 मिशन के तहत 26 नवंबर 2022 को प्रक्षेपित किया गया था।
ISRO के इन अवलोकनों से वैज्ञानिकों को प्रशांत महासागर में अल नीनो के विकसित होने के दौरान समुद्र और वायुमंडल के बीच हो रहे बदलावों को समझने के लिए अतिरिक्त उपग्रह-आधारित डेटा मिल रहा है।
Research check: “EOS-06 ने अल नीनो की भविष्यवाणी की” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। ISRO के आधिकारिक विश्लेषण में मुख्य रूप से अल नीनो से जुड़े समुद्री बदलावों—क्लोरोफिल-ए में कमी और हवाओं के कमजोर/दिशा बदलने—का उपग्रह से अवलोकन बताया गया है। अल नीनो की स्थिति और भविष्य की तीव्रता के आकलन में WMO के अलग जलवायु मॉडल और अवलोकन भी शामिल हैं।







