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राजनीति

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन, सौरभ भारद्वाज समेत कई हिरासत में

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी; नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू, मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने भी आंदोलन का आह्वान किया

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन, सौरभ भारद्वाज समेत कई हिरासत में

AI-निर्मित तस्वीर

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई में विरोध प्रदर्शन हुए। दिल्ली में आम आदमी पार्टी, छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और अन्य विपक्षी दलों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। भारतीय एक्सप्रेस के अनुसार, दिल्ली में करीब 500 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं; चुनाव आयोग इन आरोपों का खंडन करता रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया का उद्देश्य अपात्र, दोहराव वाले और अन्य गलत प्रविष्टियों को हटाना है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन को नहीं मिली पुलिस अनुमति

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी वहां पहुंचने लगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई। पुलिस ने मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाने के साथ यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए।

प्रदर्शन के दौरान सौरभ भारद्वाज, आप विधायक संजीव झा और अन्य लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और छात्र संगठन से जुड़ी नेहा बोरा समेत कई अन्य लोगों के हिरासत में लिए जाने की भी रिपोर्ट है। प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए अलग-अलग पुलिस थानों तक ले जाया गया।

मेट्रो और यातायात व्यवस्था पर भी असर

प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। कुछ प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद किए गए, जबकि कुछ जगहों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई। जंतर-मंतर और आसपास के मार्गों पर यातायात को नियंत्रित और कुछ स्थानों पर परिवर्तित किया गया।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने मुंबई में प्रदर्शन का आह्वान किया

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP ने मुंबई में भी प्रदर्शन का आह्वान किया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर से आंदोलन की घोषणा करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। संगठन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य बदलावों की मांग भी रखी है।

मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद 2 अक्टूबर को वहां समर्थकों के जुटने और प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आईं। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

मतदाता सूची को लेकर क्या है विवाद?

विवाद की मुख्य वजह चुनाव आयोग की ओर से चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ नागरिक समूहों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटने से पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ-सुथरा और अधिक सटीक बनाने के लिए नियमों के तहत सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया चल रही है। आयोग ने हाल में अपने मतदाता सूची संबंधी सॉफ्टवेयर की समीक्षा का आदेश भी दिया है। इसके तहत यह जांच की जा रही है कि इस्तेमाल की जा रही तकनीकी प्रणाली निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप काम कर रही है या नहीं।

मामला अब अदालत तक भी पहुंचा

ज्ञानेश कुमार के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों में निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। अदालत में इन आरोपों की जांच और संबंधित कानूनी सवालों पर सुनवाई होनी है।

फिलहाल दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांगें और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं, जबकि संबंधित विवादों पर न्यायिक और संस्थागत प्रक्रियाएं जारी हैं।



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