नोएडा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की उत्तराखंड के लोगों को लेकर की गई कथित ‘घुसपैठिया’ टिप्पणी के विरोध में सोमवार को नोएडा के सेक्टर-12, सेक्टर-18 और अन्य स्थानों पर लोगों ने प्रदर्शन कर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने टिप्पणी को उत्तराखंडवासियों की पहचान और सम्मान के खिलाफ बताते हुए अखिलेश यादव से बयान वापस लेने, सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की। आयोजकों ने अपनी मांगों को प्रशासन के माध्यम से संबंधित पक्ष तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की।
लखनऊ में दिए गए बयान से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत शुक्रवार, 23 अक्टूबर को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव की टिप्पणी से हुई। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने उत्तर प्रदेश में ‘सबसे बड़े घुसपैठिए’ के संदर्भ में उत्तराखंड का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तराखंड के कई हिस्सों में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए तथा उनसे माफी मांगने की मांग उठाई।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे राज्य की पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा बताया।
समाजवादी पार्टी ने दी अपनी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता और उत्तराखंड प्रभारी राजेंद्र चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव की टिप्पणी पूरे उत्तराखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संदर्भ में थी। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव का उत्तराखंड के लोगों के साथ भावनात्मक संबंध है और वे राज्य के लोगों का सम्मान करते हैं।
इस स्पष्टीकरण के बावजूद टिप्पणी को लेकर विरोध जारी है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट की जाए और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाए।
आंदोलन को व्यापक करने की चेतावनी
प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने संकेत दिया कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनकी प्रमुख मांग अखिलेश यादव से सार्वजनिक माफी और उत्तराखंड मूल के लोगों के सम्मान को लेकर स्पष्ट वक्तव्य देने की है।
फिलहाल, विवाद राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर क्षेत्रीय पहचान और सम्मान की बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संबंधित संगठनों की बैठक और प्रशासन को दिए जाने वाले ज्ञापन के आधार पर आगे की रणनीति तय किए जाने की बात कही गई है।











