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बुनियादी ढांचा

हवाई जहाज से भी तेज़ सफ़र, बेंगलुरु और चेन्नई के बीच मात्र 73 मिनट में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु और चेन्नई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे दोनों शहरों के बीच की दूरी मात्र 73 मिनट में तय होगी।

हवाई जहाज से भी तेज़ सफ़र, बेंगलुरु और चेन्नई के बीच मात्र 73 मिनट में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

AI-निर्मित तस्वीर

नई दिल्ली | दक्षिण भारत के दो प्रमुख महानगरों बेंगलुरु और चेन्नई के बीच यात्रा का अनुभव जल्द ही पूरी तरह बदलने जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत बेंगलुरु और चेन्नई के बीच हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी मात्र 73 मिनट यानी एक घंटे से थोड़ा अधिक समय में सिमट जाएगी।

वर्तमान में दोनों महानगरों के बीच सफ़र करने के लिए यात्रियों को काफ़ी समय ख़र्च करना पड़ता है। भारतीय रेलवे की सबसे तेज़ ट्रेनें भी इस दूरी को तय करने में 4 घंटे 25 मिनट का समय लेती हैं, जबकि अन्य एक्सप्रेस और मेल ट्रेनें इस सफ़र में 6 घंटे तक का समय लगाती हैं। वहीं विमान से यात्रा करने पर हवा में लगभग 1 घंटा लगता है, लेकिन एयरपोर्ट आने-जाने और सुरक्षा जाँच की लंबी प्रक्रियाओं के कारण कुल समय काफ़ी बढ़ जाता है। ऐसे में यह बुलेट ट्रेन परियोजना यात्रियों के लिए एक क्रांतिकारी विकल्प साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

  • रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से बेंगलुरु और चेन्नई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने का बड़ा प्रस्ताव सामने आया है।
  • इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के शुरू होने पर दोनों शहरों के बीच की यात्रा का कुल समय घटकर मात्र 73 मिनट रह जाएगा।
  • वर्तमान में बेंगलुरु से चेन्नई के बीच सबसे तेज़ ट्रेन द्वारा 4 घंटे 25 मिनट का समय लिया जाता है, जबकि अन्य ट्रेनों में 6 घंटे तक लगते हैं।
  • विमान से सफ़र करने में हवा में लगभग 1 घंटे का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन सीधे शहर के केंद्र से केंद्र को जोड़ेगी।
  • इस बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना की शुरुआत को लेकर अभी तक किसी आधिकारिक तारीख़ या समयसीमा का ऐलान नहीं किया गया है।

इस परियोजना के धरातल पर उतरने से दक्षिण भारत के दो सबसे बड़े आर्थिक और तकनीकी केंद्रों के बीच आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोज़ाना सफ़र करने वाले पेशेवरों और आम नागरिकों को भी भारी राहत मिलेगी। हालाँकि, रेलवे अधिकारियों की ओर से अभी तक इस परियोजना की विस्तृत डीपीआर और निर्माण कार्य शुरू होने की किसी निश्चित तिथि की घोषणा नहीं की गई है।



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