नोएडा। हिंडन नदी के किनारे नोएडा के बड़े हिस्से के स्वरूप में बदलाव की संभावना वाला करीब ₹29,000 करोड़ का प्रस्ताव सामने आया है। नोएडा प्राधिकरण ने हिंडन नदी के करीब 25 किलोमीटर लंबे हिस्से से जुड़ी इस योजना की व्यवहार्यता और संभावित प्रभावों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
प्रस्ताव के तहत नदी के घुमावदार प्रवाह का अध्ययन कर कुछ हिस्सों में उसकी दिशा को व्यवस्थित करने और जहां संभव हो वहां पुराने प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ नदी के किनारे तटबंध, हरित पट्टी और सड़क संपर्क विकसित करने का प्रस्ताव है।
करीब ₹29,315 करोड़ खर्च का प्रारंभिक अनुमान
नोएडा प्राधिकरण के प्रारंभिक आकलन में पूरी परियोजना पर करीब ₹29,315 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसमें जमीन की खरीद, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, तटबंधों के निर्माण और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं पर संभावित खर्च शामिल है।
योजना के तहत करीब 2,871 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, नदी क्षेत्र में रहने वाले लगभग 13 हजार परिवारों के पुनर्वास की स्थिति बनने का अनुमान है।
हिंडन का प्रवाह व्यवस्थित करने पर जोर
प्रस्ताव का एक प्रमुख हिस्सा हिंडन नदी के वर्तमान घुमावदार रास्ते का अध्ययन करना है। समिति पिछले करीब 100 वर्षों में नदी के प्रवाह, बाढ़ के पैटर्न, तटबंधों में हुए बदलाव और उन स्थानों की पहचान करेगी जहां पुल निर्माण या अतिक्रमण के कारण नदी का प्राकृतिक रास्ता प्रभावित हुआ है।
इसके लिए प्राधिकरण ने ड्रोन सर्वे भी कराया है। सर्वे के दौरान नदी के किनारे बसे परिवारों की संख्या और नदी में पहुंच रहे प्रदूषण के स्रोतों का भी आकलन किया गया।
व्यावसायिक उपयोग के लिए जमीन मिलने का अनुमान
प्रारंभिक योजना के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद करीब 1,200 हेक्टेयर जमीन व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध हो सकती है। इससे परियोजना पर होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा वापस मिलने और करीब ₹16,000 करोड़ तक अतिरिक्त राजस्व जुटने का अनुमान लगाया गया है।
हालांकि यह केवल प्रारंभिक आकलन है। परियोजना की वास्तविक लागत, जमीन की उपलब्धता और पुनर्वास की स्थिति समिति की जांच और आगे की विस्तृत योजना के बाद ही स्पष्ट होगी।
बाढ़ और पर्यावरण पर भी बड़ा सवाल
हिंडन नदी का यह इलाका बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसलिए प्राधिकरण ने केवल निर्माण और भूमि उपयोग की संभावनाओं को ही नहीं, बल्कि पिछले कई दशकों के बाढ़ चक्र, भूजल पुनर्भरण और नदी के पर्यावरणीय प्रभावों को भी अध्ययन में शामिल किया है।
नोएडा के मास्टर प्लान 2031 में हिंडन और यमुना के बीच नदी तट क्षेत्र की करीब 5,036 हेक्टेयर भूमि को कृषि, बागवानी, पुष्पकृषि और मनोरंजक गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया है। इस क्षेत्र में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है।
प्राधिकरण के अनुसार, नदी तट को संवेदनशील क्षेत्र मानते हुए उसके पर्यावरणीय हालात, बाढ़ के स्वरूप, भूजल पुनर्भरण और भूमि के संभावित उपयोग का विस्तृत अध्ययन जरूरी है।
पांच सदस्यीय समिति करेगी पूरे प्रस्ताव की जांच
नोएडा प्राधिकरण की ओर से गठित समिति में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी, सिविल विभाग के महाप्रबंधक एसपी सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक कपिल सिंह, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य और पर्यावरण विशेषज्ञ अभिष्ट कुसुम गुप्ता शामिल हैं।
समिति का काम नदी के पुराने प्रवाह, बाढ़ क्षेत्र, तटबंधों, अतिक्रमण, प्रदूषण और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। इसके बाद परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर रिपोर्ट प्राधिकरण के सामने रखी जाएगी।
अभी मंजूर नहीं हुई है परियोजना
₹29,000 करोड़ की यह योजना फिलहाल प्रस्ताव और अध्ययन के चरण में है। इसे अंतिम परियोजना या स्वीकृत रिवरफ्रंट विकास योजना मानना अभी सही नहीं होगा। समिति की रिपोर्ट के बाद ही इसके स्वरूप, लागत, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास को लेकर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ी चुनौती नदी, पर्यावरण और आबादी के बीच संतुलन बनाना होगी। करीब 13 हजार परिवारों के पुनर्वास और हजारों हेक्टेयर जमीन से जुड़े इस प्रस्ताव का असर केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंडन के बाढ़ क्षेत्र और आसपास रहने वाली आबादी पर भी पड़ेगा।








