नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले से एक दिन पहले बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। सुबह के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 0.35 प्रतिशत बढ़कर 22,635.70 अंक और सेंसेक्स 0.34 प्रतिशत बढ़कर 72,630.42 अंक पर पहुंच गया।
बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार
मंगलवार की तेजी में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों की अहम भूमिका रही। एक्सिस बैंक के शेयर में करीब 1.4 प्रतिशत और कोटक महिंद्रा बैंक में करीब 3.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कई बैंकों की पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट बेहतर रहने से वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।
वहीं, ट्रेंट के शेयर में करीब 10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कंपनी की ओर से दूसरी तिमाही के स्टैंडअलोन राजस्व में करीब 23 प्रतिशत सालाना वृद्धि का अनुमान जताए जाने के बाद शेयर में जोरदार खरीदारी हुई।
RBI के फैसले पर बाजार की नजर
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चल रही है। समिति बुधवार को रेपो दर और मौद्रिक नीति का फैसला जारी करेगी। बाजार में फिलहाल 25 आधार अंकों की दर बढ़ोतरी की संभावना सबसे ज्यादा जताई जा रही है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित दर वृद्धि का काफी हिस्सा शेयर कीमतों में पहले ही शामिल हो चुका है। इसलिए निवेशकों की नजर केवल रेपो दर पर नहीं, बल्कि RBI के मौद्रिक रुख, महंगाई और आर्थिक विकास के अनुमान पर भी रहेगी।
लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद संभला बाजार
भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,382.47 अंक पर और निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत ऊपर 22,555.75 अंक पर बंद हुआ था।
यह तेजी ऐसे समय आई जब दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार आठ सप्ताह की साप्ताहिक गिरावट के बाद दबाव में थे। हालिया बाजार कमजोरी में विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं की बड़ी भूमिका रही है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी चिंता
बाजार में सुधार के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड करीब 5.3 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ रहा है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमत करीब 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ऊंची कीमतें महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकती हैं।
अब RBI के रुख पर टिकी बाजार की दिशा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर RBI अपेक्षित 25 आधार अंकों की दर वृद्धि करता है और उसका रुख संतुलित रहता है, तो बाजार पर इसका असर सीमित रह सकता है। इसके विपरीत, यदि केंद्रीय बैंक आगे भी दरों में बढ़ोतरी के संकेत देता है, तो ब्याज दर से संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर बुधवार को जारी होने वाले RBI के फैसले, उसके महंगाई और विकास संबंधी अनुमान तथा आगे की मौद्रिक नीति के संकेतों पर बनी हुई है।










