नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की 57वीं बैठक में टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद सामने आए हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो रही बैठक में GST व्यवस्था को आसान बनाने और करदाताओं के लिए अनुपालन का बोझ कम करने के साथ-साथ प्रवर्तन व्यवस्था में बदलाव पर भी चर्चा हो रही है।
पांच राज्यों ने गिरफ्तारी शक्ति सीमित करने के प्रस्ताव का विरोध किया
GST अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार हटाने या उसे कड़ाई से सीमित करने के प्रस्ताव पर महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने चिंता जताई है। इन राज्यों का तर्क है कि कर चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे गंभीर मामलों में अधिकारियों के पास प्रभावी कार्रवाई के अधिकार बने रहने चाहिए।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि GST कानून की मौजूदा व्यवस्था में कुछ गंभीर अपराधों के मामलों में आयुक्त की अनुमति से केंद्रीय कर अधिकारी गिरफ्तारी कर सकते हैं। इनमें फर्जी चालान और धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने जैसे मामले शामिल हैं।
केंद्र का प्रस्ताव क्या है?
केंद्र सरकार GST अधिकारियों की सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति को हटाकर गिरफ्तारी के लिए न्यायिक अनुमति की व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव का उद्देश्य कर विवाद और वास्तविक आपराधिक मामलों के बीच स्पष्ट अंतर करना है।
सरकार की दलील है कि केवल गंभीर आपराधिक मामलों में ही गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि अपराध साबित होता है तो कानून प्रवर्तन एजेंसियां न्यायिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी कर सकेंगी। प्रस्ताव के तहत GST से जुड़े कई गैर-गंभीर अपराधों को आपराधिक दायरे से बाहर करने पर भी विचार किया जा रहा है।
अभियोजन की सीमा बढ़ाने पर भी विचार
GST के तहत आपराधिक अभियोजन शुरू करने की मौजूदा एक करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इससे अपेक्षाकृत छोटे कर विवादों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखने में मदद मिल सकती है।
सरकार का व्यापक उद्देश्य GST प्रशासन को अधिक भरोसा-आधारित बनाना और नियमित अनुपालन से जुड़े विवादों में आपराधिक कार्रवाई की गुंजाइश कम करना है।
राज्यों की चिंता क्यों अहम है?
राज्यों की आपत्ति का मुख्य मुद्दा यह है कि गिरफ्तारी की शक्ति पूरी तरह सीमित होने से बड़े पैमाने पर कर चोरी, फर्जी चालान और संगठित GST धोखाधड़ी के मामलों में प्रवर्तन कमजोर पड़ सकता है। दूसरी ओर, केंद्र और कर सुधारों के समर्थकों का मानना है कि गिरफ्तारी जैसे कठोर अधिकारों का इस्तेमाल केवल गंभीर और प्रमाणित आपराधिक मामलों तक सीमित होना चाहिए।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच केंद्रीय GST अधिकारियों ने GST अपराधों से जुड़े 72,393 मामलों में 887 गिरफ्तारियां की थीं। ऐसे में गिरफ्तारी शक्ति में बदलाव का असर GST प्रवर्तन व्यवस्था पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
GST दरों के बजाय इस बार प्रक्रिया सुधार पर जोर
57वीं बैठक का फोकस पिछले वर्ष की बड़ी GST दरों में बदलाव की प्रक्रिया के बजाय अनुपालन और प्रशासनिक सुधारों पर है। परिषद में इनपुट टैक्स क्रेडिट, GST रिफंड, पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया और विवादों के समाधान से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हो रही है।
गिरफ्तारी शक्तियों पर राज्यों के मतभेद के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिषद इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बना पाती है या नहीं और यदि बदलाव पर सहमति बनती है तो उसे लागू करने के लिए केंद्र किस तरह का कानूनी संशोधन लाता है।










