कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल में रहने के बावजूद उसका आपराधिक नेटवर्क पहले से कहीं अधिक सक्रिय और संगठित हो गया है। ताजा जांच में खुलासा हुआ है कि लॉरेंस बिश्नोई सीधे तौर पर नहीं, बल्कि एक 'शैडो कैबिनेट' के माध्यम से अपने सिंडिकेट की कमान संभाले हुए है। यह गुप्त समूह देशभर में फैले करीब 700 युवा गुर्गों के नेटवर्क को संचालित करता है, जिन्हें विशेष आपराधिक कार्यों के लिए सक्रिय किया जाता है।
गैंग की कार्यप्रणाली और विस्तार
लॉरेंस बिश्नोई ने 2000 के दशक के उत्तरार्ध में अपने गैंग की शुरुआत की थी, लेकिन जेल जाने के बाद उसके प्रभाव में कोई कमी नहीं आई है। पुलिस के अनुसार, सिंडिकेट ने अपनी जड़ें काफी गहरी कर ली हैं। पिछले 2 वर्षों में, यानी 2024 से 2026 के बीच, पुणे और पिंपरी-चिंचवड में ही इस गैंग से जुड़े 10 से अधिक जबरन वसूली के मामले दर्ज किए गए हैं।
हालिया घटनाएं और सुरक्षा चुनौतियां
हाल ही में मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। इस घटना के बाद गैंग के काम करने के तरीकों में बदलाव देखने को मिला है। जालंधर से हाल ही में हुई गिरफ्तारियों में सामने आया है कि गैंग उन लोगों को भी शामिल कर रहा है जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस ने एक आरोपी को कनाडा से लौटा हुआ बताया है और उनके पास से 9 एमएम की बेरेटा पिस्टल, एक कार और मोबाइल फोन बरामद किया है।
पुलिस की कार्रवाई
जांच एजेंसियां अब इस 'शैडो कैबिनेट' के प्रमुख सदस्यों की पहचान करने में जुटी हैं जो जेल के बाहर से गैंग का संचालन कर रहे हैं। हालांकि लॉरेंस बिश्नोई का जेल में रहना उसकी रहस्यमयी छवि को और मजबूत बनाता है, लेकिन कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब देशभर में फैले इस 700 सदस्यीय सिंडिकेट को तोड़ने के लिए रणनीति तैयार कर रही हैं। पुलिस ने इन गुर्गों की सक्रियता को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।








